Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 7 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता तृतीय अध्याय कर्मयोग
यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेऽर्जुन |कर्मेन्द्रियै: कर्मयोगमसक्त: स विशिष्यते || ७ ||
yas tvindriyāṇi manasā niyamyārabhate ’rjunakarmendriyaiḥ karma-yogam asaktaḥ sa viśhiṣhyate
Hindi Translation:-...
Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 6 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता तृतीय अध्याय कर्मयोग
कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् |इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचार: स उच्यते || ६ ||
karmendriyāṇi sanyamya ya āste manasā smaranindriyārthān vimūḍhātmā...
Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 5 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता तृतीय अध्याय कर्मयोग
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् |कार्यते ह्यवश: कर्म सर्व: प्रकृतिजैर्गुणै: || ५ ||
na hi kaśhchit kṣhaṇam api jātu tiṣhṭhatyakarma-kṛitkāryate...
Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 4 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता तृतीय अध्याय कर्मयोग
न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते |न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति || ४ ||
na karmaṇām anārambhān naiṣhkarmyaṁ puruṣho ’śhnutena cha sannyasanād eva...
Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 3 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता तृतीय अध्याय कर्मयोग
श्रीभगवानुवाचलोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघ |ज्ञानयोगेन साङ्ख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम् || ३ ||
śhrī bhagavān uvāchaloke ’smin dvi-vidhā niṣhṭhā purā proktā...
Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 2 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता तृतीय अध्याय कर्मयोग
व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे |तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम् || २ ||
vyāmiśhreṇeva vākyena buddhiṁ mohayasīva metad ekaṁ vada...











