संस्कृत के स्तोत्रों का पाठ करना एक सुंदर आध्यात्मिक अनुभव है, लेकिन बहुत से लोगों के लिए शुरुआत करना आसान नहीं होता। विशेष रूप से जब किसी श्लोक में संधि, संयुक्त अक्षर और लंबे शब्द होते हैं, तो नए पाठकों को सही ढंग से पढ़ने में कठिनाई महसूस होती है।
इसी उद्देश्य से हमने नवग्रह स्तोत्र को एक ऐसे स्वरूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे शुरुआती पाठकों को श्लोक पढ़ने और उनका उच्चारण समझने में अधिक सुविधा हो सके।
सरल पठन हेतु विभाजित नवग्रह स्तोत्र | ( Navagrah Stotram )
जपा कुसुम सड़् का शम् , काश्य पेयम् महा द्युतिम् ।
तमो रिम् सर्व पा पघ् नम् , प्रण तोस्मि दिवा करम् ॥ 1॥दधि शङ्ख तुषा रा भम् , क्षीरो दार्णव सम् भवम् ।
नमा मि शशिनम् सो मम् , शम्भोर् मुकुट भूषणम् ॥ 2॥धरणी गर्भ सम् भू तम् , विद्युत् कान्ति समप्रभम्।
कुमारम् शक्ति हस्तम् तम् , मङ्गलम् प्रणमा म्यहम् ॥ 3॥प्रियङ् गु कलिका श्या मम् , रूपेणा प्रतिमम् बुधम् ।
सौम्यम् सौम्य गुणो पेतम् , तम् बुधम् प्रणमा म्यहम् ॥ 4॥देवा नाम् च ऋषि णाम् च , गुरुम् कान् चन सन् निभम् ।
बुद्धि भूतम् त्रिलोके शम् , तम् नमामि बृहस्पतिम् ॥ 5॥हिम कुन्द मृणा लाभम् , दैत्या नाम् परमम् गुरुम् ।
सर्व शास्त्र प्रवक् ता रम् , भार् गवम् प्रणमा म्यहम् ॥ 6॥नीलान् जन समा भासम् , रवि पुत्रम् यमा ग्रजम् ।
छाया मार् तण्ड सम् भूतम् , तम् नमामि शनैश् चरम् ॥ 7॥अर्ध कायम् महा वीर्यम् , चन् द्रा दित्य विमर् दनम् ।
सिम् हि का गर्भ सम् भू तम् , तम् राहुम् प्रणमा म्यहम् ॥ 8॥पलाश पुष्प सड़् काशम् , तारका ग्रह मस् तकम् ।
रौद्रम् रौद्रात् मकम् घोरम् , तम् केतुम् प्रणमा म्यहम् ॥ 9॥फलश्रुति :
इति व्यास मुखोद् गीतम् , यह् पठेत् सु समा हितह् ।
दिवा वा यदि वा रात्रौ , विघ्न शान्तिर् भविष्यति ॥ 10॥नर नारी नृपाणाम् च , भवेद्दुः स्वप्न नाशनम् ।
ऐश्वर्य मतुलम् तेषाम् , अरोग्यम् पुष्टि वर् धनम् ॥ग्रह:
ग्रह नक्षत्र जाहा पीडाहा , तस् कर अग्नि समुद्भवाहा ।
ताहा सर्वाहा प्रशमम् यान्ति , व्यासो ब्रूते न संशयः ॥॥ इति श्री व्यास विरचितम् नव ग्रह स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
मूल नवग्रह स्तोत्र (Original Navagraha Stotra)
इस प्रस्तुति का उद्देश्य
यह प्रस्तुति उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो:
- पहली बार संस्कृत स्तोत्र पढ़ रहे हैं।
- संयुक्त अक्षरों के कारण श्लोक पढ़ने में कठिनाई महसूस करते हैं।
- धीरे धीरे संस्कृत पढ़ने का अभ्यास करना चाहते हैं।
- मूल स्तोत्र के साथ एक सरल पाठन मार्गदर्शिका चाहते हैं।
इसमें श्लोकों के कुछ शब्दों का विभाजन केवल पढ़ने की सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि नए पाठक प्रत्येक शब्द को थोड़ा अधिक सहजता से पढ़ सकें।
महत्वपूर्ण सूचना
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह मूल नवग्रह स्तोत्र का परिवर्तित रूप नहीं है।
मूल श्लोकों में किसी प्रकार का परिवर्तन करने का हमारा उद्देश्य नहीं है। यह केवल एक सहायक पाठन प्रारूप (Reading Guide) है, जिसे शुरुआती पाठकों की सुविधा के लिए तैयार किया गया है।
साथ ही, यह प्रस्तुति संस्कृत के शुद्ध व्याकरण या आधिकारिक उच्चारण का अंतिम मानक होने का दावा नहीं करती। इसका उद्देश्य केवल पाठ को सरल बनाना है, ताकि संस्कृत सीखने की शुरुआत करने वाले लोग आत्मविश्वास के साथ स्तोत्र पढ़ सकें।
यह स्वरूप कैसे तैयार किया गया?
इस प्रस्तुति को तैयार करने से पहले विभिन्न उपलब्ध स्रोतों का अध्ययन और तुलना की गई। उसके बाद शब्दों का विभाजन इस प्रकार करने का प्रयास किया गया कि पढ़ते समय नए पाठकों को कम से कम कठिनाई हो।
फिर भी, संस्कृत एक अत्यंत समृद्ध और गहन भाषा है। इसलिए अलग अलग परंपराओं या विद्वानों के अनुसार कुछ स्थानों पर भिन्न मत मिलना स्वाभाविक है।
आपके सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं
यदि आपको किसी शब्द के विभाजन में कोई त्रुटि दिखाई दे, तो कृपया हमें अवश्य बताइए।
यदि आप संस्कृत के विद्वान, आचार्य या विद्यार्थी हैं और इस प्रस्तुति को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो हम आपका हृदय से स्वागत करते हैं।
आपके सुझाव इस प्रयास को और बेहतर बनाने में हमारी सहायता करेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग सरलता से संस्कृत स्तोत्रों का पाठ कर सकें।
आगे की योजना
यदि पाठकों का सहयोग और स्नेह मिला, तो भविष्य में अन्य संस्कृत स्तोत्रों को भी इसी प्रकार के सरल पाठन प्रारूप में प्रस्तुत करने का हमारा प्रयास रहेगा।
हमारी यही कामना है कि संस्कृत के सुंदर स्तोत्र अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचें और हर व्यक्ति बिना भय या संकोच के उनका पाठ प्रारंभ कर सके।






