Bhagavad Gita Chapter 5 Shloka 24 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता पंचम अध्याय कर्मसंन्यासयोग
योऽन्त:सुखोऽन्तरारामस्तथान्तज्र्योतिरेव य: ।स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ।। २४ ।।
yo 'ntaḥ-sukho 'ntar-ārāmas tathāntar-jyotir eva yaḥsa yogī brahma-nirvāṇaṁ brahma-bhūto 'dhigachchhati
Hindi Translation:-...
Bhagavad Gita Chapter 5 Shloka 23 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता पंचम अध्याय कर्मसंन्यासयोग
शक्नोतीहैव य: सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् |कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्त: स सुखी नर: || २३ ||
śhaknotīhaiva yaḥ soḍhuṁ prāk śharīra-vimokṣhaṇātkāma-krodhodbhavaṁ vegaṁ...
Bhagavad Gita Chapter 5 Shloka 22 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता पंचम अध्याय कर्मसंन्यासयोग
ये हि संस्पर्शजा भोगा दु:खयोनय एव ते |आद्यन्तवन्त: कौन्तेय न तेषु रमते बुध: || २२ ||
ye hi sansparśha-jā bhogā...
Bhagavad Gita Chapter 5 Shloka 21 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता पंचम अध्याय कर्मसंन्यासयोग
बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् |स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते || २१ ||
bāhya-sparśheṣhvasaktātmā vindatyātmani yat sukhamsa brahma-yoga-yuktātmā sukham akṣhayam aśhnute
Hindi Translation:- बाहर के...
Bhagavad Gita Chapter 5 Shloka 20 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता पंचम अध्याय कर्मसंन्यासयोग
न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत्प्राप्य चाप्रियम् |स्थिरबुद्धिरसम्मूढो ब्रह्मविद् ब्रह्मणि स्थित: || २० ||
na prahṛiṣhyet priyaṁ prāpya nodvijet prāpya chāpriyamsthira-buddhir asammūḍho...
Bhagavad Gita Chapter 5 Shloka 19 | श्रीमद्भगवद्गीता
श्रीमद् भगवद् गीता पंचम अध्याय कर्मसंन्यासयोग
इहैव तैर्जित: सर्गो येषां साम्ये स्थितं मन: |निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद् ब्रह्मणि ते स्थिता: || १९ ||
ihaiva tair...











