भारतीय काव्यशास्त्र की परम्परा अत्यन्त समृद्ध और प्राचीन है। विभिन्न आचार्यों ने काव्य के स्वरूप, रस, अलंकार, रीति, ध्वनि तथा वक्रोक्ति आदि सिद्धान्तों का प्रतिपादन करते हुए अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना की। प्रमुख ग्रन्थ एवं उनके लेखक निम्नलिखित हैं
| सांख्य | ग्रन्थ | लेखक |
|---|---|---|
| 1 | नाट्यशास्त्र | भरतमुनि |
| 2 | काव्यप्रकाश | मम्मट |
| 3 | साहित्यदर्पण | विश्वनाथ |
| 4 | काव्यालंकार | भामह |
| 5 | दशरूपक | धनञ्जय |
| 6 | शृङ्गारप्रकाश | भोजराज |
| 7 | वक्रोक्तिजीवित | कुन्तक |
| 8 | ध्वन्यालोक | आनन्दवर्धन |
| 9 | काव्यादर्श | दण्डी |
| 10 | चन्द्रालोक | जयदेव |
परीक्षा हेतु ट्रिक
इन दस ग्रन्थों और उनके लेखकों से संबंधित प्रश्न संस्कृत साहित्य एवं काव्यशास्त्र की परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।
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